नशा है नाश
नशे में नही शान, यह भली-भाँति जान,
सुन खोल के कान, यह है बीमारियों की खान,
तू है मेजबान, यह है मेहमान,
मान ना मान, यह छीनेगा पहचान,
पाना है सम्मान,सुधार खान-पान,
क्यों है अनजान, यह लेगा जान,
देनी ही है जान, तो देश पर हो कुर्बान,
ना हो परेशान, नशा मुक्ति ठान||
-जतिन गर्ग "बादल"
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